अनुभूति

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Anand Rai, Jagran

दैनिक जागरण, लखनऊ
Year of Exp: 19 वर्ष years

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छोटे दलों ने पूर्वाचल राज्य को बनाया हथियार

Posted On: 12 Mar, 2011  
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अपनी जड़ों से कभी जुदा नहीं हुये अज्ञेय

Posted On: 5 Apr, 2010  
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वाकपटु नेता के आखिरी दिन

Posted On: 17 Mar, 2010  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं

Posted On: 3 Mar, 2010  
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अहले सियासत बनाम पैगाम-ए-मोहब्‍बत

Posted On: 18 Feb, 2010  
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कलम अ।ज उनकी जय बोल

Posted On: 14 Feb, 2010  
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बबुआ गये परदेस बदल लिये भेष

Posted On: 13 Feb, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

नेपाल और भारत मित्र राष्ट्र है परन्तु जो भारतने  नेपालको अपना स्टेट जैसा समझता है.ये नही पता हमारा देश किसी भी समय किसिका गुलाम नही था..भारत को अच्छि तरह याद होगा कि कुमाउ,गढवाल,गोरखपुर,सिक्किम,दार्जीलिङ,देहरादुन,बहुत सारे आपलोग इस जगहका इतिहास देखे ओ हमारा नेपालका जमिन है.ये सब नेपालियों ने भी जानते है.अभी भी नेपालके south border से अतिक्रमण कररहाहै.खुल्ला सिमानाका फाइदा उठारहा है.१९४७ मे जब ब्रिटिश ने इंडिया छोडा उसने कब्जा कियाहुवा वापस कियाथा लेकिन नेपाल के नालायक नेता ओ कि कारण से हमारा ये स्तिथि हुवा.अब हम international high courtमे जाएंगे.नेपाल के मामिलामेए हस्तक्षेप मत करो तो अच्छा रहेगा.अपने आपको खुदा मत समझो आप लोग कि भाषा मे बहादुर यक गलियोका चोउकिदार,घरमे काम करने वाला यही समझ जाते है.लेकिन हमारी भाषा मे गोरखा की सान है.देखो १९९८ मे कस्मिर से पाकिस्तानीओ को कैसे मार गिराया.जो इन्डियन आर्मी ने कर नसका.

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आनंद जी अभिवादन... व्यवस्था के खिलाफ बन्दूक उठाने के किसी भी प्रयास के मै व्यक्तिगत रूप से खिलाफ हु पर अगर फूलन देवी की बात होती है तो उस प्रतिक्रिया को हम आंख बंद करके गलत नहीं ठहरा सकते ...यदि वो आजादी के पहले होती तो समाज के इन अत्याचारों से लड़ने के लिए उन्हें एक सेनानी का दर्जा दिया जाता .. मै ऐसी महिलाओं के कदम को गलत नहीं मानता क्योकि जब आपके साथ कुछ भी नहीं होता तो केवल होती है आपकी हिम्मत और अपने जीवन के संघर्ष में सामने कोई भी हो ..आगे चल देना फूलन देवी जैसी महिलाओं द्वारा ही संभव है.. जिन परिस्थितियों का उल्लेख फूलन देवी की जीवन में आता है उनमे सामान्यतः कोई महिला जीने की इच्छा ही छोड़ देती ... फूलन का जीवन सिर्फ महिलाओं के लिए एक संबल की तरह है बल्कि प्रशासन और समाज के लिए भी एक सीख है ..

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

भईया प्रणाम आज के समय मे पुर्वांचल कुछ लोगो के केवल और केवल अपना साम्राज्य खडा करने की कवायद है एक चाह है ठीक वैसे ही जैसे कोई नरभक्षी सालो बाद किसी शिकार को देखा हो ! पुर्वांचल विकास निधि की स्थापना ( मायावती के प्रथम काल से ) के बाद जितना पैसा पुर्वांचल को आया है उतना पैसा अकेले बिहार को 2009 तक नही आया था लेकिन यह पैसा किधर गया यह सोचने वाली बात है । लगभग 27 सांसदो और 120 से उपर विधायको वाले इस क्षेत्र को लुटने वाला और कोई नही बल्कि यही सांसद और विधायक है ! अब चुकि ये और लुटना चाहते है इस लिये एक नई जमीन तैयार की जा रही है जिसका नाम पुर्वांचल है ! बाघेलखंड , काशी राज्य , गोरखनाथ जैसे तीन क्षेत्रो मे बिभाजित पुर्वांचल को अलग राज्य नही अपने ही लोगो से अपनापन की जरुरत है ! पुर्वांचल का विकास होना चाहिये बिनाश नही ! सादर

के द्वारा:

आनन्द जी, प्रणाम उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल राज्य आसमान से गिरे खजूर पर अटके से  अधिक नहीं होगा। उ. प्र. में गाजियाबाद के बाद राजस्व में  सोनभद्र का स्थान है।सोनभद्र से उत्पादित बिजली, कोल खनन,  पत्थर खनन आदि से प्रदेश ही नहीं देश का विकास हुआ है।  सोनभद्र में विकास की जगह विनाश को बढ़ावा मिला है।  विकास के संदर्भ में पूर्वांचल के प्रति नियति ठीक नहीं होने  के कारण पूर्वांचल राज्य की मांग सामयिक हो सकती है  पर भविष्य में आजादी के पूर्व के देशी रियासतों से अधिक  नहीं हो सकता। गंभीर सवाल ही नहीं गंभीर संकट भी है।  वैसे बीमारी(विकास के अभाव) के हिसाब से आप के   ईलाज (सुझाव) की बात बेहतर है। इससे चरम पंथियों  पर काबू पाने में सफलता मिल सकती है।  प्रमोद कुमार चौबे  ओबरा सोनभद्र   

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के द्वारा: Anand Rai, Jagran Anand Rai, Jagran

siyasijang इससे देश का भला नहीं होता जो इस जुंग को करवाता है उसका वर्ह्सब किसी को मरवाने के जायद नहीं बनता आनंदजी इस लेख से सरकारों को बताया है की जब जंग हुई एक बार कुछ समय के लए इस्थि को हिला कर रख देता है पोलिसे की दिअरी के कुछ पेज भर्ती आखिर मे यही होता हत्यारे को ज़लाद पकड़ा जायेगा या जयादा शोरगुल होता तब कुछ बेकसूर पकडे जाते पैर केस सुनवाई तक का पोलिसे का होता है उसके बाद उन्केखिलाफ़ कोई साबुत न मिलने छुट जाते कल जो हादसा मंत्रीजी पैर हुआ पैर इससे यही साबुत होता है सोचने को मजबूर होना पड़ेगा की मंत्री जी सुरक्षा नहीं हो पाए तब आदमी की सुरक्षा कैसे हो पयीगी u .p .क्या देश के और भागो मे इस पारकर के राजनीती कांड जब होते हैं सुरक्षा का ? आता है पैर होता कुछ नहीं क्यूँ नहीं होता सर्कार जब तक कोई एन्क़ुइर्य करवाती तब तक साबुत मित्त्जतेय हैं हाँ कभी सर्कार समय रहते क.बी.इ. की एन्क़ुइर्य होती तब कुछ सामन्य आता है पैर इससे मरने वाला चलगया अब छे कितना हाथ पटके raho

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आन्नद भईया प्रणाम आपने तो राजनीति के खुनी खेल का पुरा कच्चा चिठ्ठा खोल के रख दिया । जरुरत है इस लेख को घर घर मे भेजने की , जरुरत है यु पी की जनता को इन उजले कपडे मे घुमने वाले काले धन्धे वाले नेतावो को उजागर करने कि । आज ही की खबर है कि भारत के 8 राज्यो मे अफ्रिका के 26 गरीब देशो से ज्यादा गरीब रहते है और उसमे सबसे ज्यादा यु पी है और यह है यु पी की असलियत । आज यु पी की दुर्दशा केवल और केवल इन नेतावो से हुई है और अगर ये ऐसे ही वोट पाते रहे तो यह खुनी खेल एक ना एक दिन पुरी यु पी को मटिया मेट कर देगा । धर्मस्थली के नाम से मशहुर यु पी इन काले कारनामो के नाम से जाना जायेगा । जागो जनता जागो । आपका नवीन भोजपुरिया

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पूर्वांचल को छला जाना उसकी नियति बन चुकी है। देश की आजादी में इस क्षेत्र ने अहम योगदान दिया। पंडित जवाहर लाल नेहरू,चन्द्रशेखर व वी.पी सिंह जैसे नेता इस अंचल से उठकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे लेकिन इस क्षेत्र के साथ न्याय नहीं हुआ। यहां के गरीबी की बात संसद में भी उठी। फिर भी ढाक के वही तीन पात। यूपी से निकलकर उत्तराखंड अलग राज्य बन गया। झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य भी बना दिए गए। आनन्द जी आपने सही कहा है कि पूर्वांचल राज्य का मुद्दा हाशिए पर गए ही लोग गरमाते हैं। सिर्फ अखबारों में ही पूर्वांचल राज्य का मुद्दा गरम होता है,आम जनता कभी इसमें शामिल नहीं हुई। उत्तराखंड आन्दोलन के दौरान मैं मुरादाबाद में था और देहरादून भी जाना होता था,किस तरह पहाड़ के लोग आंदोलन के प्रति जुटे हुए थे,यह देखने लायक था। वहां के लोगों के जुझारूपन के कारण ही उत्तराखंड का सपना साकार हुआ। अब तो बिहार जैसा राज्य भी विकास के पायदान पर हमसे आगे है। नारायण दत्त तिवारी ने यूपी में मुख्यमंत्री रहते हुए गजरौला व काशीपुर को उद्योगों से समृद्ध कर दिया। यहां तो गोरखपुर का खाद कारखाना सालों से बंद है। कई बार अखबारों में मंत्री गण के बयान इसे चालू करने के बारे में आए लेकिन फिलहाल तो इसे चालू किया जाना दूर की कौड़ी ही दिखायी दे रहा है। चीनी मिलों की हालत से भी हम सब वाकिफ हैं। दरअसल वीरबहादुर और कल्पनाथ राय जैसे नेताओं की भी आज कमी खलती है क्योंकि दिल्ली और लखनऊ में यहां की आवाज बुलंद करने वाला रहनुमा नहीं दिखता।

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सबसे पहले मैं शुक्रगुजार हूं उन पाठकों का जिन लोगों ने मेरी हौसला आफजाई की। सबके प्रति दिल से आभार। शरद जी आप पूर्वांचल के विकास के लिए सहयोग करना चाहते हैं। आपका स्‍वागत। आप अपनी मेल आई डी पोस्‍ट कर दें तो हमें आपसे पूर्वांचल के संदर्भ में बातचीत करने में सुविधा रहेगी। दैनिक जागरण ने पूर्वांचल की समस्‍याओं पर नियमित स्‍टोरी प्रकाशित की है और जनप्रतिनिधियों से संवाद स्‍थापित कर उसके निदान की दिशा में भी पहल की है। आपके पास पूर्वांचल के विकास के संदर्भ में कैसी योजना है, उसकी जानकारी होने से खबर के स्‍तर पर और इवेंट के स्‍तर पर हमें सहूलियत होगी। आपकी नेक सोच के लिए आपको मुबारकवाद।

के द्वारा: Anand Rai, Jagran Anand Rai, Jagran

आनंद जी अगर आप और जागरण कुछ सहयोग करे तो पूर्वांचल के विकास के लिए कुछ किया जाये. जिससे पूर्वांचल की उन्नति हो. हम सभी जानते है की राजनीती का सच क्या है. पुराने पन्नो को पुलटने से कुछ नहीं होगा. आगे बढ़ने के लिए सही निति बनाकर काम करना पड़ेगा. जागो युवा वर्ग - ऊपर वाला उन्ही का साथ देता है जो अपनी मदद खुद करता है . कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो ये जनम हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमे ये व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो न निराश करो मन को उपयुक्त पाक्तिया मैथली शरण गुप्त द्वारा रचित कविता से ली गयी है मगर इनको पढने मात्र से उत्साह बढ़ जाता है. शरद पाण्डेय ऑक्सफोर्ड, ब्रिटेन

के द्वारा: Sharad Pandey Sharad Pandey

आज भी मजूरी के सीजन में कुछ लोग गांव लौट आते और फिर वे दिल्‍ली, मुम्‍बई, कलकत्‍ता, हरियाणा की ओर रुख कर देते हैं। तब घरों से :::::इ रेलिया बैरी पिया को लिये जाय रे::::: जैसे विरह गीत गूंजने लगते हैं। तब वेदना अंखुवाती है और हर घर की दुल्‍हनों के ख्‍वाबों की सरहद दिल्‍ली, मुम्‍बई और कलकत्‍ता हो जाती है। दुख तो तब बढ जाता है जब परदेस गये उनके पिया एड़स लेकर लौटते हैं और जवानी तिल तिल कर मरने लगती है। आनंद जी वाकई आपके लेख नें दिल और दिमाग दोनों को झकझोर के रख दिया उपेक्षा का दंस झेलता पूर्वांचल राजनेताओं और उनकी पार्टियों का चरागाह बन गया है इसे जानबूझ कर गिरमिटया मजदूरों के मनीऑडर की अर्थव्यवस्था के सहारे छोड़ दिया गया है ।

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आदरणीय आनंद जी और सभी जागरण बंधुओ को शरद पाण्डेय का नमस्कार. आपके ब्लॉग को पढ़कर पूर्वांचल की पूर्व गतिविधियों के बारे में पता चलता है. हमे विकास की दर को गति देने के लिए पूर्वांचल के युवा वर्ग की सोच को बदलना पड़ेगा. जब कभी में पूर्वांचल की तुलना दुसरे राज्यों से करता हु तो कई तथ्य सामने आते है जिसे से की हमारा पूर्वांचल अभी भी देश के बाकी हिस्सों से पिछड़ा हुआ है. हमे apni सोच और युवा वर्ग की sochne की chamta को badalna hoga. और एक nayi disha की और प्रस्थान करना hoga. कारन कुछ इस प्रकार से है - १. पुँर्वांचल के सभी जिलो में युवा वर्ग का जागरूक न होना और शिक्षा का आभाव. २. युवा वर्ग में दूर दर्शिता और भविष्य प्रबंधन में कमी, एक दुसरे पैर निर्भरता को होना. ३. चूँकि पूर्वांचल का अधिकतर हिस्सा गाँव में निवास करता है और खेती पैर निर्भर है इसलिए खेती की आधुनिक तकनीकियो की जानकारी ना होना. इससे किसानो का खेती पर से विश्वास उठ रहा है और वो दुसरे शेहरो की तरफ रोज़गार की तलाश में प्रस्थान कर रहे है. ४. हमारे युवा वर्ग के लिए अभी भी संसाधनों की कमी है उनके लिए किसी भी प्रकार की सरकारी या गैर सरकारी संस्था नहीं है जो उन्हें भविष्य के बारे में सही जानकारी दे और मार्ग दर्शन करे. ५. सरकार द्वारा दिए गए धन का सही उपयोग न होना. सरकार द्वारा शुरू की गयी विभिन नीतियों का सही तरीके से लागू न होना. ६. रोजगार की कमी से युवा वर्ग का रुझान धनउपार्जन के गलत तरीको की तरफ अक्सर आकर्षित हो जाता है जो बड़ा ही दुखद पूर्ण है. ७. पूर्वांचल में आधुनिक उध्योगिकीकरण की कमी है और ये कहना गलत नहीं होगा की ना के बराबर है. ये mera pehla ब्लॉग है इसलिए galtiyo के लिए chama chahta हु. scripting में कुछ error की vajah से mujhe ये comment yahi khatam करना pad रहा है. शरद पाण्डेय Oxford, UK

के द्वारा: spande10 spande10

बात सिर्फ पूर्वांचल की नहीं समूचे सूबे की होनी चाहिये। यह ठीक है कि पूर्वांचल पश्चिमी उप्र की तुलना में पिछडा हैापर पद्रेश की हालत भी तो खस्‍ता हैा तेंडुलकर स‍िमिति की रिपोर्ट के अनुसार यहां के हर 5 लोगों में से 2 लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैंा शहरों की तुलना में गांवों की स्थिति और भयावह हैा पर किसी भी राजनीतिक दल के लिये ये मुद़दा नही हैा केंद्र से आया पैसा कहां गया कैसे खर्च हो रहा है इसकी मानीटरिंग करने की फर्सत किसी को नहीं हैा दरअसल यहां तीन तरह के नेता असली,नकली और फसलीा अंतिम दो तो महज चुनाव के समय प्रकट होते हैं और चुनाव के साथ ही विदा हो जाते हैंा पहले तरह के लोग भी वहीं मुद़दा उठाते हैं जिससे उनकी राजनीतिक फसल लहलहाती रहेा कितनी बडी त्रासदी है कि जिन योजनाओं मसलन फूड पार्क,टेक्‍सटाइल पार्क,रामगढ ताल,खाद कारखाना जैसे मुद़दों पर जो लोग सरकार पर दबाव डालने में सक्षम हैं वे लोग कभी बोलते ही नहींा ऐसे लोगों की खामोशी में न केवल पूर्वी उप्र बल्कि पूरे सूबे की बदहाल छिपी हैा पिुलहाल इस सूबे का भगवान ही मालिक हैा गिरीश पांडेय दैनिक जागरण गोरखपुर

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योगी जी भी अब प्रचण्‍ड के बारे में बोले हैं। पहले भी बोलते रहे हैं। यह जागरण में भी छपा है- गोरखपुर सदर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माओवादी नेता व नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री प्रचण्ड अपना मानसिक सतंुलन खो चुके हैं। इसीलिए वह भारत जैसे परंपरागत व विश्वसनीय पड़ोसी के खिलाफ अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। नेपाल सरकार प्रचण्ड की गैर जिम्मेदाराना हरकतों पर अंकुश लगाये। प्रचंड द्वारा नेपाल के दिवंगत राजा वीरेन्द्र विक्रम शाह की हत्या का आरोप भारत पर लगाये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए योगी ने कहा कि प्रचंड चीन तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों की कठपुतली बनकर भारत और नेपाल के प्राचीन सौहार्दपूर्ण सम्बंधों को खराब करने के लिए इस प्रकार की लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने भारत पर नेपाल की जमीन हड़पने का बेबुनियाद आरोप लगाकर सीमा पर तनाव पैदा करने का प्रयास किया था।

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मैं सभी मित्रों का शुक्रगुजार हूँ जिन लोगों ने इस बहस को आगे बढाया. मुझे खुशी है कि हम सबकी आवाज नेपाल सरकार तक पहुँची है. प्रचंड के रवैये पर नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने नाराजगी दिखाई है. साथी सुमित ने पहले ही इसका जिक्र कर दिया है. मैं कहना यह चाह रहा हूँ कि जो प्रचंड नेपाल में खुद को राज सत्ता का विरोध कर स्थापित हुए उनसे ज्यादा संघर्ष माधव नेपाल ने किया है. असली कम्युनिस्ट तो माधव नेपाल ही हैं. २००६ में उन्होंने नेपाल नरेश की हुकूमत ख़त्म करने के लिए आन्दोलन चलाया तभी सफलता मिली. उन्हें भारतीय समाज और उसके रिश्तों का अहसास है. माधव नेपाल राहुल सांकृत्यायन से प्रभावित हैं. यकीनन उनकी सत्ता में भारत नेपाल के रिश्तों को आंच नहीं आयेगी. उन्हें बधाई. बधाई वहां की तमाम जनता को भी जिसने निरंतर भारत नेपाल के रिश्तों की गाँठ को मजबूत किया है. आनंद राय- दैनिक जागरण, गोरखपुर

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दुख हुआ. हिमालय का निवासी हूँ, नेपाल की गतिविधियों पर मेरी नज़र है. क्या कहूँ, अभी चार दिन पहले लिखी कविता का अंश देखिए.: "कविता की तराई में जारी है लड़ाई पानी पानी चिल्ला रही है वैशाली विचलित रहती है कुशीनारा रात भर सूख गया है हज़ारों इच्छिरावतियों का जल जब कि कविता है सरसराती आम्रपालि मेरा चेहरा डूब जाना चाहता है उस की संदल- माँसल गोद में कि हार कर स्खलित हो चुके हैं मेरी आत्मा की प्रथम पंक्ति पर तैनात सभी लिच्छवि जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है. सहसा ही एक ढहता हुआ बुद्ध हूँ मैं अधलेटा हिमालय के आर पार फैल गया एक भगवा चीवर आधा कंबल में आधा कंबल के बाहर सो रही है मेरी देह कंचनजंघा से हिन्दुकुश तक पामीर का तकिया बनाया है मेरा एक हाथ गंगा की खादर में कुछ टटोल रहा है दूसरे से नेपाल के घाव सहला रहा हूँ और मेरा छोटा सा दिल ज़ोर से धड़कता है हिमालय के बीचों बीच." महत्वपूर्ण पोस्ट. लेकिन अकेले प्रचण्ड को दोश नहीं दे सकते. इस गड़बड़ी की तह तक जाना है हमें.

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