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पूर्वाचल के मुसलमानों को सहेजने की सियासत

Posted On: 16 Jan, 2010 Others में

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आनन्द राय गोरखपुर : पूर्वाचल के मुसलमानों को सहेजने की नयी कवायद शुरू हो गयी है। विभिन्न राजनीतिक दलों में बंटे मुसलमानों को एक मंच पर लाने की तरकीब लगायी जा रही है। पहल दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने एक गैर राजनीतिक संगठन बनाकर की है। अब उनकी आवाज को गांव-गांव में पहंुचाने की कोशिश शुरू हो गयी है।
    राजनीति में हाशिये पर पहंुच गये कुछ मुस्लिम नेताओं ने अभियान की कमान संभाल ली है। पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम नेताओं की रहनुमाई कम हुई है। उनके प्रतिनिधित्व में कमी की समीक्षा नये सिरे से हुई है। रहनुमाओं का मानना है कि उनकी तादाद तो अधिक है लेकिन खेमों में बंटने के कारण ताकत उभर नहीं रही है। इसी कारण अब गैर राजनीतिक संगठनों से फिर से एक जुट होने का आह्वान किया जा रहा है। शाही इमाम के आगाज के बाद गोरखपुर में पूर्व विधायक और सपा के जिलाध्यक्ष रहे डा.मोहसिन खान की सक्रियता बढ़ी है। उनके साथ नगर निगम में पार्षद दल के नेता जियाउल इस्लाम समेत कई मुस्लिम नेता आगे बढे़ हैं। फरवरी माह में बड़े सम्मेलन की तैयारी हो रही है। अभियान कितना कारगर होगा, यह तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन अतीत पर नजर डालें तो शाही इमाम के पिता के फतवे का काफी असर रहा है। उनके फतवे ने सियासी बदलाव भी किये हैं।
           गौरतलब है पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के कई छोटे राजनीतिक दल वजूद में हैं। बसपा से बगावत करने के बाद पूर्व मंत्री डा. मसूद ने नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी बनायी। कुछ दिनों बाद दल दो टुकड़ों में बंट गया। एक की कमान मसूद के हाथ में थी और दूसरे का नेतृत्व अरशद ने संभाल लिया। आजमगढ़ में लोकसभा चुनाव के दौरान उलेमा कौंसिल का सियासी चेहरा सामने आया। और इसके बैनर पर चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों ने प्रभावित किया। बड़हलगंज के चर्चित सर्जन डा. अयूब ने भी राजनीतिक मोर्चेबंदी की और उनकी पीस पार्टी ने बलिया से लेकर बाराबंकी तक खलबली मचा दी। सपा पहले से ही मुसलमानों की हमदर्द थी। इस तरह मुसलमानों के बीच कई खेमे बन गये। इसी खेमेबंदी को दूर करने के लिए शाही इमाम के सहारे कुछ ताकतें गोलबंद हो रही हैं।

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Janaye के द्वारा
May 21, 2011

No more s***. All posts of this qaultiy from now on

manoj rai के द्वारा
February 5, 2010

kiski baat kar rahe hai bhaee sahab, advani ko pradhan mantree banna hai chahe kimat kuch bhi ho, BJP ka nash karke rakh diya do netao ne rajnath singh aur advani ne,ab mulayam singh ko dubara AZAMkhan KA prem jaga hai, musalmaan BJP ko kaun harayega usko vote dengey, we kisi party ke nahi kisi desh ke nahi koee imaan nahi , koee dharam nahi fir bhi hum hinduo se acche hai, unka ek target to hai ki bharat ka pradham mantree ek musalmaan bane, humara kya target hai, ki musalmaan ka vote mile kimat chahe kuch bhi ho, akele rajnath singh aur advani jee ne bjp ko duba diya, hindutwa ki raksha to ab bhagwan bharose hi hai,,,,,,,,,,,,,,,,,, jai hind

navneet tripathi gorakhpur के द्वारा
January 30, 2010

kya karege muslman bhi to abhi tak khud ko vot bank hi mante rahe hye. unke huk aur adhikar ki mange esi ko kendra me rakh kar hi uthati, unke rahnuma bhi vot ka hisab-kitab laga kar hi unke hit ki avaj uthate hye.

    Nona के द्वारा
    May 21, 2011

    Superior thinking demonstrated above. Thnaks!

rajeev shrivastava के द्वारा
January 16, 2010

पूर्वांचल में ही नहीं पूरे देश में मुसलमानों के वोट को हािसल करने के िलए तुष्‍टीकरण नीित अपनायी जा रही है इसलिए मुसलमान अपनी सुिवधा के िहसाब से राजनीित कर रहा है। इसीिलए उसका वोट बंट रहा है। पहले मौलाना बुखारी ने मुसलमानों को कांग्रेस से अलग करके वोट की राजनीित करवायी और अब उनके बेटे अहमद बुखारी भी उन्‍हीं की तरह खुदा बनने की राह पर हैं। राजीव श्रीवास्‍तव, ग्‍वािलयर

    Lorin के द्वारा
    May 20, 2011

    Thanks for sahirng. Always good to find a real expert.


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