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प्रचंड के चेहरे से उतर गया नकाब

Posted On: 17 Jan, 2010 Others में

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भारत और नेपाल मित्र राष्ट्र है. मेरे एक परिचित अवसर मिलने पर भी नेपाल नहीं जाना चाहते. कहते हैं कि उनकी कुंडली में विदेश योग है. नेपाल  जाकर अपने योग को सस्ते में गंवाना नहीं चाहते. यह प्रसंग सिर्फ इसलिए कि  नेपाल यहाँ के लोगों को विदेश नहीं लगता.  ढाई  दशक में सरहद के कस्बों से लेकर काठमांडू तक अनगिनत यात्रा की. रहन सहन और परिवेश भले अलग लगा लेकिन कभी यह महसूस नहीं हुआ कि गैर मुल्क में आये हैं. तब भी जब माओवादी आन्दोलन चरम पर था, तब भी जब राज परिवार की ह्त्या हुई और लोग उबल रहे थे, वहां कोई भय जैसी बात नहीं थी. पर अब भय का वातावरण बनाया जा रहा है.
 शुरुआत प्रचंड ने की है. वही प्रचंड जो राज परिवार से मुकाबला करते हुए अपने फरारी के दिनों में भारत में रहते थे. जिस भारत की जमीन ने उन्हें खडा होने को बल दिया उसके खिलाफ जहर उगल रहे हैं.  उन्हें पीलीभीत नेपाल का हिस्सा दिखने लगा है. कुछ दिन के लिए प्रधानमंत्री हुए तो भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे थे और अब जहर उगल रहे हैं. भारत और नेपाल की सरकार उनके बयान पर क्या सोचती है, यह तो बाद की बात है. नेपाल में माओवाद को खडा करने वाले बाबू राम भट्टराई को भी प्रचंड का बयान पसंद नहीं आया. उन्होंने खुले तौर पर उनकी आलोचना की. उन्होंने प्रचंड को सोच समझ कर बोलने की सलाह दी. उन्होंने प्रचंड को यह समझाने की भी जुर्रत की कि भारत के विरोध में बेवजह बोलने से कुछ नहीं होने वाला है.
नेपाल में सत्ता के विरोध में आम आदमी के मन में गैरत पैदा करने का काम बाबूराम ने किया है. उन्होंने माओवादी आन्दोलन को जमीन दी है. प्रचंड उग्र विचारों से भले हमेशा सुर्ख़ियों में रहे हों लेकिन बाबूराम के प्रति वहां के माओवादियों में एक श्रद्धा देखी गयी है. अब तो लोग खुलेआम कहने लगे हैं कि प्रचंड चीन के इशारे पर भारत विरोधी अभियान में सक्रिय  हो गए हैं. उन्हें भारत और नेपाल के संबंधों का ख्याल नहीं है. वे वर्षों पुराने रिश्ते को सर्द कर देने पर आमादा हैं. प्रचंड को यह ख्याल नहीं है कि दोनों देशों के बीच अभी भी रोटी बेटी का संबध है. उन्हें इस बात का ज़रा भी ख्याल नहीं है कि तमाम झंझावातों के बीच सरहद पर दोनों मुल्कों के लोग एक दूसरे का सुख दुःख समझते हैं. उन्हें तो बस अपनी सियासत करनी है. नेपाल पर राज करने की अधूरी ख्वाहिश को अंजाम देना है. ये वही प्रचंड हैं जो प्रधानमंत्री बनने के बाद लाखों रूपये की पलंग पर सोने लगे और अपने काफिले में मंहगी से मंहगी गाड़ियां रखने लगे. नेपाल का आम आदमी तो उन्हें उसी दिन से पहचान गया. नेपाल के लड़ाका माओवादियों के dil  से तो वे उसी समय उतर गए.
सच मानिए कि उनके चेहरे पर एक नकाब लगा है. वो धीरे धीरे उतर रहा है. अभी बाबूराम ने उन्हें नसीहत दी है. आगे और भी लोग उन्हें सबक देंगे. भारत के खिलाफ जहर उगल कर वे भी नेपाल में पनाह लिए उन तमाम भारत विरोधियों की कतार में खड़े हो गए हैं जो हर पल भारत की अशांति का ख्वाब देखते हैं. प्रचंड अपनी हद में रहे तो उनकी सेहत के लिए ठीक होगा. उनके सियासी अरमान भी तभी फलीभूत हो सकते हैं जब उनकी आत्मा साफ़ सुथरी हो.

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100 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jagadish के द्वारा
April 30, 2013

नेपाल और भारत मित्र राष्ट्र है परन्तु जो भारतने  नेपालको अपना स्टेट जैसा समझता है.ये नही पता हमारा देश किसी भी समय किसिका गुलाम नही था..भारत को अच्छि तरह याद होगा कि कुमाउ,गढवाल,गोरखपुर,सिक्किम,दार्जीलिङ,देहरादुन,बहुत सारे आपलोग इस जगहका इतिहास देखे ओ हमारा नेपालका जमिन है.ये सब नेपालियों ने भी जानते है.अभी भी नेपालके south border से अतिक्रमण कररहाहै.खुल्ला सिमानाका फाइदा उठारहा है.१९४७ मे जब ब्रिटिश ने इंडिया छोडा उसने कब्जा कियाहुवा वापस कियाथा लेकिन नेपाल के नालायक नेता ओ कि कारण से हमारा ये स्तिथि हुवा.अब हम international high courtमे जाएंगे.नेपाल के मामिलामेए हस्तक्षेप मत करो तो अच्छा रहेगा.अपने आपको खुदा मत समझो आप लोग कि भाषा मे बहादुर यक गलियोका चोउकिदार,घरमे काम करने वाला यही समझ जाते है.लेकिन हमारी भाषा मे गोरखा की सान है.देखो १९९८ मे कस्मिर से पाकिस्तानीओ को कैसे मार गिराया.जो इन्डियन आर्मी ने कर नसका.

Janisa के द्वारा
May 21, 2011

What a joy to find smooene else who thinks this way.

satyam kumnar के द्वारा
March 28, 2010

premchand ji tumne sahi kah maapgar ek baat to hamko bi sochni hai aakhir kya karan hai ki ek chhote se desh ka vyakti bhi hamare dersh ke baare me man me jo aaya kah diya kyo

Durga Dutt के द्वारा
March 18, 2010

आनंद जी वास्तव मे इन भारत विरोधियों को यह भी ज्ञात नहीं की भारत का विरोध कर वह अपनी माँ का ही गला कटने पर उतारू हैं आपने बहुत ही सलीके से अपनी लेखनी के माध्यम से इन प्रचंड जैसे लोगो को बेनकाब करने का काम किया है बधाई

rajiv k mishra के द्वारा
February 3, 2010

prachand in dino bharat ke khilaf kyon bol rahe hain, yah pol apne kholi hai. aapki khabron ka main murid hoon. thanks

कौशल शाही के द्वारा
February 2, 2010

भारत की उदारता उसके लिए सबसे घातक है. हमारे वेदों और शास्त्रों में कहा गया है- शठे शाठ्यम समाचरेत, हमें भारत के खिलाफ बोलने वाले हर शख्स के खिलाफ यही रूख अपनाना चाहिए. भैया आपका प्रयास बहुत अच्छा है और इससे जाग्रति आ रही है.

    Letitia के द्वारा
    May 20, 2011

    That’s 2 cevler by half and 2×2 clever 4 me. Thanks!

rajmani pandey के द्वारा
February 2, 2010

prachand ki kalai khul gayee hai. kisee ne sahi likha hai ki kath ki haandi dubara nahi chadhti.

varun singh के द्वारा
January 30, 2010

sir aj apke sabhi lekh padhe. vakai prachand ke masle par apne bahut hi damdar bahas shuru ki. vaise bhi nepal ke bare men apki jankari bahut achchi hai. achche vicharon ke liye badhai.

Rahul Rai के द्वारा
January 29, 2010

बहुत ही प्रासंगिक और ज्ञानवर्धक लेख है ………….आप के लेखो से हमें भी एक ज़मीन मिलती है ….धन्यवाद्

Ajay mishra के द्वारा
January 29, 2010

bahas to bahut ho chuki, ab kisee thos pahal kee mang honi chahiye. vaise prachand apne rajnitik svarth ke liye bharat virodh ka dikhavaa kuch jayad karte hain.

    Morrie के द्वारा
    May 21, 2011

    And I thuoght I was the sensible one. Thanks for setting me straight.

yash के द्वारा
January 29, 2010

yah bahas sargarbhit hai, par iska dayra badhnaa chahiye, maslan iske liye bharat-nepal ke jimmedaar logon ka sajhaa manch bannaa chahiye.

Anand Rai, Jagran के द्वारा
January 28, 2010

भारत और नेपाल के संबंधों को लेकर दोनों देशों के लोग बहुत सजग हैं. मेरी इस पोस्ट पर दोनों देशों के लोगों ने उन लोगों की आलोचना की है जो संबंधों में दरार डालने का काम कर रहे हैं. इस तरह की बहस का नतीजा है कि प्रचंड को भी यह याद आ गया कि उनकी दोनों बेटियाँ भारत में ही ब्याही हैं. भगवान् उन्हें सद्बुद्धि दें.

कौशल के द्वारा
January 28, 2010

भारत के सामने मुश्किल हालत हमेशा अपनों ने ही पैदा की है. मैडम इंदिरा गांधी ने जिस बँगला देश को को बनवाया उसी बंगलादेश में भारत विरोधी अभियान चलता है. नेपाल तो भारत विरोधी अभियान का हब बन गया है. चाहे पर्चंदा हों या आई एस आई और पाकिस्तानी दूतावास, सभी भारत के खिलाफ लगे हैं. और चीन का तो पूछिए मत … सजग राणे की जररूत है. कौशल

udaya pant के द्वारा
January 28, 2010

I think its more political gimik and utterances than his mind. Vote ki raajniti hei!

v. rai के द्वारा
January 26, 2010

jab bhee prachand ne india ke pachh men bhee bolaa to bhee comment aur nahi bola to bhi comment, yahee hamari aadat ho gayee hai. hamen to cheejon ko behatar dhang se samjhne kee jarurat hai.

एस के वर्मा, गोंडा के द्वारा
January 26, 2010

प्रचंड का चरित्र समझ में नहीं आता है. यह शख्स कभी भारत के विरोध में जहर उगलता है और कभी भारत के प्रति अपना आत्मीय राग. अभी भारत के विरोध में पता नहीं कितनी दलीलें दे रहा था और अब कह रहा है कि भारत से हमारा रोटी और बेटी का रिश्ता है. अरे मूरख भारत और नेपाल से तो रोटी बेटी का रिश्ता सदियों से है. तुमने अपनी दो बेटियाँ भारत में क्या ब्याह दी तो जब जी में आया भारत को गाली दे लिए और जब जी में आया रिश्ते की बात करने लगे. भारत के प्रतापी राजा रामचंद्र को जनकपुर के राजा जनक ने स्वयम्बर रच कर अपना दामाद बनाया था. संभल जाईये प्रचंड महाराज, अभी आपके लिए बहुत मौक़ा है. , एस के वर्मा, गोंडा

अभिनव के द्वारा
January 26, 2010

नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने कहा है कि अगर 28 मई तक संविधान का खाका तैयार नहीं हुआ, तो इसके जिम्मेदार माओवादी होंगे। उन्होंने माओवादियों से अपनी चरमपंथी सोच छोड़ने के लिए कहा। नेपाल ने कहा, माओवादी जटिलताओं के बारे में जानते हैं। उन्होंने ही संवैधानिक तौर पर विधानसभा चुनावों और संविधान का खाका तैयार करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा, माओवादियों को कट्टरपंथी सोच छोड़नी होगी। नेपाल ने कहा कि माओवादियों को सुधरना होगा ताकि जनता को विश्वास हो सके कि वह नागरिक राजनीतिक पार्टी हैं।

vivek mishra के द्वारा
January 24, 2010

अब प्रचंड का दिमाग कुछ ज्यादा खराब हो गया है, उन्हें भारत के बारे में अनाप- शनाप बोलने की आदत पद गयी है. इसी आदत के चलते वे चाहते हैं कि कुछ ऐसा बोलते रहें कि माओवादी और नेपाल की जनता भारत के खिलाफ हो जाए. यही बात है कि अब वे राजा की ह्त्या की साजिश का आरोप भारत पर मढने लगे हैं. प्रचंड एक मशवरा मान लो कि भारत के खिलाफ तुम्हारी दाल गलने वाली नहीं है.

sumit के द्वारा
January 24, 2010

yogi ji ko akhbaar men nahi sansad men sarkar ke logon se dabaav banaa kar bolnaa chahiye. yah aisaa mudda hai ki agar ise sahi fouram par nahi rakhaa gya to bolne se kuch nahi hoga.

aagrah के द्वारा
January 24, 2010

योगी जी भी अब प्रचण्‍ड के बारे में बोले हैं। पहले भी बोलते रहे हैं। यह जागरण में भी छपा है- गोरखपुर सदर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माओवादी नेता व नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री प्रचण्ड अपना मानसिक सतंुलन खो चुके हैं। इसीलिए वह भारत जैसे परंपरागत व विश्वसनीय पड़ोसी के खिलाफ अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। नेपाल सरकार प्रचण्ड की गैर जिम्मेदाराना हरकतों पर अंकुश लगाये। प्रचंड द्वारा नेपाल के दिवंगत राजा वीरेन्द्र विक्रम शाह की हत्या का आरोप भारत पर लगाये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए योगी ने कहा कि प्रचंड चीन तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों की कठपुतली बनकर भारत और नेपाल के प्राचीन सौहार्दपूर्ण सम्बंधों को खराब करने के लिए इस प्रकार की लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने भारत पर नेपाल की जमीन हड़पने का बेबुनियाद आरोप लगाकर सीमा पर तनाव पैदा करने का प्रयास किया था।

sankalp के द्वारा
January 22, 2010

ऐसी खबर मिली है कि प्रचण्‍ड और बाबूराम के बीच कुछ वाद- विवाद हुआ है। इस खबर में कहां तक सच्‍चाई है। यह उजागर होना चाहिये।

piyush kumar rai के द्वारा
January 22, 2010

hii anand bhai aapne sahi kaha ki prachand wo din bhul gaye jab vo is bharat mata ki god me ghumte the. asal me ye unki galti nahi hai ye rajniti aur vo bhi vote ki rajniti itni gandi hoti hai ki ye sahi aur galat ki pahchan bhula deti hai .aur ye to aap jante hi ho ki apne desh me bhi log aisa karte hai jaha tak baat hai nepal kabhi bhi bharat ka virodhi nahi raha hai chahe vo rajwans raha ho ya congress ya maovadi . aur ye prachand jaise log aate rahenge aur chale jayenge aur apne bharat ko kuch nahi hone wala hai prachand aisa isliye kar rahe hai kyonki unko satta ki bhuk lage gayi hai aur jise ye lage jati hai vo ise dubara yen ken prakaren pana chahta hai jai hind

vivek mishra के द्वारा
January 22, 2010

is tarah kee faaltoo baton men padna apna dimaag kharaab karnaa hai. prachand ki harakat par main to yahi kahna chahoongaa ki- hathi chala jata hai aur kutte bhaunkte rahte hain.

Rahul shahi के द्वारा
January 22, 2010

hame lagta hai ki kisee desh ke bahari rishte ko jo kamjor karta hai vah apne hi desh se droh karta hai. fir nepal jaisa desh to to hamesha bharat par aashrit rahaa hai. prachand ko yah baat apne man men hamesha sochni chahiye.

    Vlora के द्वारा
    May 21, 2011

    What a joy to find such clear thinking. Tahnks for posting!

shubham ary के द्वारा
January 22, 2010

rajniti chahe bharat ki ho chahe nepal ki, har jagah gande log aa gaye hain. isse desh ki janta ke rishton par koi asar nahi padne vala hai.

girish pandey jagran के द्वारा
January 21, 2010

दोनों देशों के संबंध परंपरागत और ऐतिहासिक हैं। दोनों देशों में रोटी’बेटी का रिश्‍ता इसका सबूत है। इस रिश्‍ते को बिगाडने वाले दोनों देशों के आवाम के दुश्‍मन हैं। इससे दोनों देशों की जनता को सिर्फ नुकशान ही नुकशान होगा। लाभ सिर्फ इस मुद़दे पर राजनीि‍त करने वालों को होगा। दोनों देशों की जनता को यह समझना चाहिये और वह समझ भी रही है। प्रचंड जैसे लोगों की नकारात्‍म राजनीति लंबी नहीं होती। और यही हुआ भी। नकारात्‍मक राजनीति करने वालों के लिये यह संदेश है। काठ की हांडी बार’बार नहीं चढती।

    Dotty के द्वारा
    May 21, 2011

    Stands back from the keyboard in amazement! Tkhnas!

V RAI- azamgarh के द्वारा
January 21, 2010

is stambh men desh prem hai par doosron ki bhavnaa samjhne kee jaroorat hai. un logon ke dil men bharat ke prati nafrat kyon aa rahi aur kaun log use hawa de rahe hain unkee nabj pakdne kee jaroorat hai.

manoj के द्वारा
January 21, 2010

नेपाल पहले पर्यटकों को लुभाता था. वहां सुख शान्ति का अद्भुत नजारा था. पर प्रचंड जैसे लोगों ने सत्ता पाने के लिए हिमालय की बर्फीली हवाओं में बारूद घोल दी. उन्हें सत्ता मिली भी लेकिन उनके बीच आपस में ही संघर्ष छिड़ गया. माधव नेपाल ने अगर भारत के समर्थन में प्रचंड को लताड़ लगानी शुरू की है तो उन्हें साधुवाद.

    Christina के द्वारा
    May 21, 2011

    Touchdown! That’s a raelly cool way of putting it!

Anand Rai, Jagran के द्वारा
January 21, 2010

यह आलेख बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नेपाल की सरकार बेहद संवेदनशील हो गयी है और भारत के प्रति अनाप-शनाप बोलने वालों पर लगाम लगाई जा रही है.

    Navid के द्वारा
    May 21, 2011

    What a joy to find such clear thinking. Thnkas for posting!

kush के द्वारा
January 20, 2010

to india must take a lesson from taliban that in starting pakistan support taliban against afganistan and now taliban become a big problem to pakistan itself. the same thing against nepal india support prachand and now he become anti to india. don’t support any terrorist in future. india is self handle the nepal without any one.

ANAND RAI के द्वारा
January 20, 2010

मैं सभी मित्रों का शुक्रगुजार हूँ जिन लोगों ने इस बहस को आगे बढाया. मुझे खुशी है कि हम सबकी आवाज नेपाल सरकार तक पहुँची है. प्रचंड के रवैये पर नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने नाराजगी दिखाई है. साथी सुमित ने पहले ही इसका जिक्र कर दिया है. मैं कहना यह चाह रहा हूँ कि जो प्रचंड नेपाल में खुद को राज सत्ता का विरोध कर स्थापित हुए उनसे ज्यादा संघर्ष माधव नेपाल ने किया है. असली कम्युनिस्ट तो माधव नेपाल ही हैं. २००६ में उन्होंने नेपाल नरेश की हुकूमत ख़त्म करने के लिए आन्दोलन चलाया तभी सफलता मिली. उन्हें भारतीय समाज और उसके रिश्तों का अहसास है. माधव नेपाल राहुल सांकृत्यायन से प्रभावित हैं. यकीनन उनकी सत्ता में भारत नेपाल के रिश्तों को आंच नहीं आयेगी. उन्हें बधाई. बधाई वहां की तमाम जनता को भी जिसने निरंतर भारत नेपाल के रिश्तों की गाँठ को मजबूत किया है. आनंद राय- दैनिक जागरण, गोरखपुर

sumit rana के द्वारा
January 19, 2010

ajay jee aap bilkul hairat men n rahiye. khushee manaaiye. ek achchhee pahal. nepal ke pradhanmntree madhav kumar nepal ne aaj prachand ko khoob lataad lagaayee. unhone prachand ko bharat ke baare men bebuniyaadee baaten n kahne kee salaah dee hai. main iske liye jagranjunction aur anand ji ko badhai dena chahtaa hoon, jinhone is par bahas chalaayee aur is mudde ko uthayaa. nepaal ne bahut hi samajhdaaree ka parichay diyaa hai. isse dono deshon kee mitrtaa banee rahegee.

ajay lahuli के द्वारा
January 19, 2010

सुमित जी, हैरत में हूँ आपकी प्रतिक्रिया से!!! अजेय जी उस हवा को पहचानने के लिए कह रहे हैं जो चीन व अमेरिका से चल रही है जो विश्व सत्ता के केंद्र हैं. जो ‘छोटे’ देश को अपने सुविधा के मुताबिक इस्तेमाल केर रहे हैं. नेपाल के संदर्भ में इमोशनली आप ठीक कह रहे हैं, लेकिन चीजें इमोशनली तय करने लगे तो कभी सम्बन्ध बिगड़ेंगे ही नहीं..उम्मीद है कि आप के सवाल को अजेय जी और स्पष्ट करेंगे…

sumit rana के द्वारा
January 19, 2010

yah bhi kahoonga ki prachand ke masle par bharat sarkar ko thos pahal karne ke liye abhiyaan chalnaa chaihiye.

sumit rana के द्वारा
January 19, 2010

ajay ji baat chhote bade desh ki nahi hai, baat sadbhaavnaa kee hai. nepal ke prati bharat sadaiv udaar raha hai. vhaan bhi logon ki bhaavnaayen bharat ke hak men rahi hain. Anand ji ne roti aur beti ke rishte ki or ishara bhi kiya hai. fir aap kis hawa ko pahchanne ki bat kar rahe hain.

Ajay kamar के द्वारा
January 19, 2010

लेकिन मैं फिर ज़ोर दे कर कहूँगा, कि नेपाल जैसे छोटे देश का प्रचण्ड जैसे पपेट शासक, मरता क्या न करता? आज वहाँ चंगेज़ खान को बिथा दीजिए वह भी इस से ज़्यादा कुछ नहीं कर पाएगा. अपने मन की करेगा तो सपरिवार भून दिया जाएगा. लोकतंत्र तो मज़ाक बन ही गया है. उस हवा को पहचानो दोस्तो, जो बड़ी ताक़तवर है. मुझे पीली भीत की आँचलिक्ता से पूरी सहानुभूति है, लेकिन हम करें भी तो क्य आनन्द भाई?

    Nevea के द्वारा
    May 21, 2011

    At last, somneoe comes up with the “right” answer!

ajay lahuli के द्वारा
January 19, 2010

भय का चूल्हा…..आखिर कब तक?????

Isht dev के द्वारा
January 19, 2010

लोकतंत्र की यही ख़ूबी है आनन्द भाई. भय का चूल्हा नहीं सुलगाएंगे तो राजनीति की रोटी कैसे सिकेगी?

ajey के द्वारा
January 19, 2010

पंत जी , आप का टाईटल बताता है आप नेपाल के क़रीब रहते हैं. भोगौलिक ड्र्ष्टि से. फिर भी इसे विदेश मानते हो? देश की सीमाएं क्या सत्ता के गलियारो में ही तय होती हैं? अनन्द जी के पोस्ट पर मैंने एक कविता डाली है. देखिएगा.

    Nibby के द्वारा
    May 20, 2011

    THX that’s a great anwesr!

neeraj rajput- dhampur के द्वारा
January 19, 2010

Although India and Nepal have shared a common-past in terms of history, culture, religion and border but Today’s Nepal is certailnly becoming a ‘foreign’ country for Indians…Nepalese are now more inclined towards China, and like India-bashing, which was not the case till few years back.

uday pant के द्वारा
January 19, 2010

nepal desh zaroor lagata hei par hei videsh, culture, itihas hamara ek hei bas yahee hei vishesh

manoj के द्वारा
January 18, 2010

bharat ne hamesha nepal ke prati udaartaa dikhaayee hai lekin bharat virodhi takton ne use apnee gatividhiyon ka kendra banaa diyaa hai. paakistaan pahle se sakriy tha aur ab cheen bhee aage badh gayaa hai. prachand cheen ka mohraa hai. use dabaane kee jaroorat hai taaki doosrree taakten bharat ke khilaaf sakriy n hon.

Shailesh के द्वारा
January 18, 2010

bhaut sahi kaha Anand Jee.

Anuj के द्वारा
January 18, 2010

very true..and Nice post…

    Jenn के द्वारा
    May 20, 2011

    Satnds back from the keyboard in amazement! Thanks!

Vats के द्वारा
January 18, 2010

आनंद जी, माओवाद की हकीकत से हर कोई वाकिफ है. जनता को और कितना बेवकूफ बनाएंगे यह लोग? अब इनकी कलई उधड़ चुकी है. सत्ता के लिए हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाले ऐसे तत्वों को केवल आतंकवादी समझना चाहिए और किसी भी प्रकार से इनका महिमामंडन ना होने पाए इसका ख्याल होना चाहिए.

sumit rana के द्वारा
January 17, 2010

ajai lahuali aur ajey ke vichar achche lage. sabse sach to yahee ki prachand jaise log cheen kee naram aur mulayam god men baith kar bharat ke khilaf abhiyaan chala rahe hain. doosre ajey ki kavita mujhe bahut achchhi lagi. khstaur par- सहसा ही एक ढहता हुआ बुद्ध हूँ मैं अधलेटा हिमालय के आर पार फैल गया एक भगवा चीवर आधा कंबल में आधा कंबल के बाहर सो रही है मेरी देह कंचनजंघा से हिन्दुकुश तक पामीर का तकिया बनाया है मेरा एक हाथ गंगा की खादर में कुछ टटोल रहा है दूसरे से नेपाल के घाव सहला रहा हूँ और मेरा छोटा सा दिल ज़ोर से धड़कता है हिमालय के बीचों बीच.” ye lain man ko chho gayee. sach kahoon to himalay ke longo kee is buland avaj se ANAND RAI ji ki post ka mahtv badh gayaa hai. balki kai nye tathy jud gaye hain.

ajay lahuli के द्वारा
January 17, 2010

आनन्द जी, हाल के वर्षों में नेपाल अब भारतीयों के लिए विदेश ही बन चुका है. सिर्फ प्रचंड को कोसना समस्या का हल नहीं है. चीन की ‘नरम मुलायम’ गोद का प्रलोभन ही है की प्रचंड रोटी- बेटी के सम्बन्ध को भुलाने पर आमादा है. चीन ही नहीं और भी देश हैं जो भारत के साथ नेपाल के संबंधों को सहज नहीं देखना चाहते…बस चश्मा लगा कर सरकार प्रचंड के पीछे काम कर रही ताकतों का पोस्टमार्टम तो करे. स्थिती और स्पष्ट होगी…

ajey के द्वारा
January 17, 2010

दुख हुआ. हिमालय का निवासी हूँ, नेपाल की गतिविधियों पर मेरी नज़र है. क्या कहूँ, अभी चार दिन पहले लिखी कविता का अंश देखिए.: “कविता की तराई में जारी है लड़ाई पानी पानी चिल्ला रही है वैशाली विचलित रहती है कुशीनारा रात भर सूख गया है हज़ारों इच्छिरावतियों का जल जब कि कविता है सरसराती आम्रपालि मेरा चेहरा डूब जाना चाहता है उस की संदल- माँसल गोद में कि हार कर स्खलित हो चुके हैं मेरी आत्मा की प्रथम पंक्ति पर तैनात सभी लिच्छवि जब कि एक बुद्ध कविता में करुणा ढूँढ रहा है. सहसा ही एक ढहता हुआ बुद्ध हूँ मैं अधलेटा हिमालय के आर पार फैल गया एक भगवा चीवर आधा कंबल में आधा कंबल के बाहर सो रही है मेरी देह कंचनजंघा से हिन्दुकुश तक पामीर का तकिया बनाया है मेरा एक हाथ गंगा की खादर में कुछ टटोल रहा है दूसरे से नेपाल के घाव सहला रहा हूँ और मेरा छोटा सा दिल ज़ोर से धड़कता है हिमालय के बीचों बीच.” महत्वपूर्ण पोस्ट. लेकिन अकेले प्रचण्ड को दोश नहीं दे सकते. इस गड़बड़ी की तह तक जाना है हमें.

    Infinity के द्वारा
    May 20, 2011

    You’re on top of the game. Thanks for sahrnig.

sumit rana के द्वारा
January 17, 2010

Anand ji apka yah lekh bahut samyik aur prerak hai. hame lagtaa hai ki ab maovadiyo ke beech do gut ho gaye hain aur prachand apna vajood banaaye rakhne ke liye bharat ke khilaf anap shanap bol rahe hain. sumit


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