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फिर अपनी औकात दिखाने लगे प्रचंड

Posted On: 19 Jan, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सरहद पर आयोजित एक सभा में प्रचंड ने पीलीभीत को नेपाल का हिस्सा बताया, तब उनके मन में यह भाव जरूर रहा होगा कि उनका यह हथियार सही निशाने पर बैठेगा. उनके हाथ से रेत की तरह फिसल रहे माओवादी फिर उन्हें कंधे पे बिठा लेंगे. उनका यह हथियार चल नहीं पाया. माओवादी लड़ाके हैरत में पड़ गए. उन्हें तो खुद समझ में नहीं आया कि पुष्प कमल दहल क्या बोल रहे हैं. माओवादियों के लोकप्रिय नेता बाबुराम भट्टराई ने तो एक संवाददाता को दिए गए साक्षात्कार में प्रचंड की आलोचना कर दी. साफ़ कह दिया कि भारत के खिलाफ बोलने से कुछ नहीं होगा. प्रचंड को अपनी नाकामयाबी पर झुंझलाहट हुई और उन्होंने नया तीर निकाल लिया.
सोमवार को प्रेस ट्रस्ट को दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि हमें भारत की भूमिका पर संदेह है. हालांकि  यह कहते हुए उन्होंने थोड़ी सी चतुराई दिखाई और यह भी कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि पूरा भारत माओवादियों के खिलाफ है. लेकिन नौकरशाहों में या खुफिया एजेंसियों में और राजनीतिक नेतृत्व में यह धारणा हो सकती है. उनका कहना है कि शांति प्रक्रिया और संविधान की रूपरेखा तय करने में भारत का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला. उनका कहना है कि  भारत का यह रूप इसलिए देखने को मिला क्योंकि उसे चुनावों में माओवादियों का उभरकर आना गंवारा नहीं था. अब वे अपनी चिंताओं पर भारत के साथ उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ता करना चाहते हैं. ऊंट पहाड़ के नीचे आ गया है. पर यह प्रचंड के तरकश का ऐसा तीर है जिसके जरिये वे मावोवादियों के दिल में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं. लम्बे समय से उनके इशारे पर सिर्फ नकारात्मक गतिविधियों को अंजाम दे रहे नेपाल के माओवादी थक गए हैं. वे बाबुराम भट्टराई जैसे नेता की अगुवाई में कुछ करना चाहते हैं. माओ लड़ाकों की कितनी टीमें प्रचंड को ठेंगा दिखाकर अपना अस्तित्व बना चुकी हैं, इसका अंदाजा तराई क्षेत्र में लगता है. मजे की बात तो यह है कि जब प्रचंड को सत्ता मिली तो उन्होंने सिर्फ अपनी ताकत बढ़ाने की  सोची. लोग अभी भूले नहीं होंगे. बारा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले जाली नोटों के कारोबारी यूनुस अंसारी के अब्बा हुजूर और नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह की सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले सलीम मियाँ अंसारी को २००७ में सत्ता पलटते ही गिरफ्तार किया गया था. फिर उन्हें छोड़ दिया गया. सलीम मियाँ छूटने के बाद निरंतर ताकतवर होते गए. उन्हें किसने ताकत दी. बहुत से लोग जानते हैं कि प्रचंड से उनका अंदरूनी गठजोड़ हो गया. पर इस बात को बहुत ही सलीके से छुपाया गया. माओवादी जानते हैं कि चांदी के पलंग पर सोने वाले और सोने के चम्मच से खाने वाले प्रचंड उनका हित नहीं सोच सकते हैं.

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Eagle के द्वारा
May 21, 2011

That saves me. Thanks for being so seibnsle!

Parveen Sundriyal के द्वारा
February 12, 2010

अब भारत को भी नेपालियों के पर्ती अपनी सोच बदलनी चहिये. ये भारत में खा कर मोटे होते है और फिर हमारी जड़ खोदते है कम से कम हमें उनको दी हुई सुविधाए कम कर के उनसे उतनी फीस जरूर लेने चहिये जितनी अन्य विदेशियों से लेते है.

    Margie के द्वारा
    May 21, 2011

    That’s not just the best aneswr. It’s the bestest answer!

navneet tripathi gorakhpur के द्वारा
January 30, 2010

bharat me jivit rah kar bharat pe hi gurranana prachand ki rajniti ka hissa ban gaya hye

    Jessalyn के द्वारा
    May 20, 2011

    At last, someone comes up with the “right” awsner!

abhimanyu tyagi के द्वारा
January 23, 2010

Prachand ab yeh jaan gaye hai ki unki gedar bhabki se ab kuch nahi hone wala hain… woh humesha se he hindustan ke wirudh bolte rahe hain.. aur yeh baat woh bhi acchi tarah jante hai ki hindustan toh nepal ka sabse bada hiteshi hain … hindustan sirf nepal ka sachha dost hai nahi hai balki hindustan khud waqt-bawaqt nepal ki madad karta hai aur humesha saath khada rehta hai har sukh-dukh mein nepal ke. Nepal ki janta aur mawowadi ab prachand ki hakikat jaan chuke hain . Prachand ek jhutha aadmi hai .. woh swarthi hain aur lalchi bhi. Prachand ko china ka agent bhi bataya jata hai jo ki jagjahir bhi ker deta hai khud prachand…. nepal ki janta ko khud faisla kerke aise logo ko bahar ker dena chaiyeh desh se.

    Zaiyah के द्वारा
    May 20, 2011

    Glad I’ve finally found somethnig I agree with!

Damodar Pangeni Rupandehi, Nepal के द्वारा
January 20, 2010

Bharat aaur nepal purane dost he. Lekin hamara desh ka Prachanda aapane pagalpan ke karen se hamare bich darar aarahehai. Dono desh Dost he, dono k bech roti aur beti ka samandh hai, hame Pagal parchanda ke karan se dost pe darar liyena nahi chaheye.

    Mena के द्वारा
    May 20, 2011

    That’s the best anwser of all time! JMHO

Rakesh bhartiya के द्वारा
January 20, 2010

प्रचंड खिसय्नी बिल्ली खम्बा नोचे वाली कहावत चरितार्थ कर रहे है और सत्ता से दूर होकर भारत के पार्टी चीन की कठपुतली बन पूर्वग्रह से गर्सित होकर काम कर रहे है,राकेश भारतीय

    Shirl के द्वारा
    May 21, 2011

    At last, soeomne comes up with the “right” answer!

sumit rana के द्वारा
January 19, 2010

nepal ke pradhanmntree madhav kumar nepal ne aaj prachand ko khoob lataad lagaayee. unhone prachand ko bharat ke baare men bebuniyaadee baaten n kahne kee salaah dee hai. main iske liye jagranjunction aur anand ji ko badhai dena chahtaa hoon, jinhone is par bahas chalaayee aur is mudde ko uthayaa. nepaal ne bahut hi samajhdaaree ka parichay diyaa hai. isse dono deshon kee mitrtaa banee rahegee.


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